डायट देहरादून द्वारा आयोजित ‘हेरिटेज वाक ‘ को प्रतिभागियों ने बताया ज्ञानवर्धक और रोचक

*हेरिटेज वॉक के माध्यम से विद्यार्थियों ने जानी देहरादून की ऐतिहासिक विरासत*

उत्तराखंड, देहरादून। 9 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून द्वारा 9 राजकीय विद्यालय के 45 विद्यार्थियों और 9 मार्गदर्शक शिक्षकों को देहरादून की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा स्थापत्य विरासत से परिचित कराने के उद्देश्य से हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डायट देहरादून के प्राचार्य गोविंद राम जायसवाल के मार्गदर्शन और दिशा-निर्देशन में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यक्रम समन्वयक ऋचा जुयाल द्वारा सभी मार्गदर्शक शिक्षकों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों का स्वागत किया गया तथा हेरिटेज वॉक के उद्देश्य से अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि हेरिटेज वॉक का उद्देश्य विद्यार्थियों द्वारा पुस्तकों में पढ़े गए इतिहास को वास्तविक ऐतिहासिक स्थलों से जोड़ना, स्थानीय इतिहास और संस्कृति के प्रति जिज्ञासा विकसित करना तथा अपनी समृद्ध विरासत के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
हेरिटेज वॉक में विषय विशेषज्ञ और गाइड विजय भट्ट द्वारा विद्यार्थियों को विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों की पृष्ठभूमि, ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य विशेषताओं तथा देहरादून के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थलों का अवलोकन करते हुए इतिहास को अनुभवात्मक रूप से समझने के लिए प्रेरित किया।
हेरिटेज वॉक की शुरुआत ऐतिहासिक घंटाघर से की गई । विद्यार्थियों ने घंटाघर की स्थापत्य विशेषताओं, ऐतिहासिक महत्व तथा देहरादून शहर की पहचान में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी प्राप्त की। गाइड विजय भट्ट ने विद्यार्थियों को घंटाघर से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराया तथा बताया कि किस प्रकार यह स्थल समय के साथ देहरादून की प्रमुख पहचान बन गया। घंटाघर क्षेत्र का मुख्य आकर्षण रहा घंटाघर के पास स्थित घोसी गली में एक गुप्त कमरा, जो महान क्रांतिकारी रास बिहारी बोस का निवास था। वे देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान (FRI) में सितंबर 1906 से मई 1914 तक हेड क्लर्क के रूप में कार्यरत थे। इसी ऐतिहासिक स्थल से उन्होंने 1912 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने और 1915 के गदर विद्रोह जैसी प्रमुख क्रांतिकारी योजनाओं को अंजाम दिया था।
हेरिटेज वॉक का अगला पड़ाव पल्टन बाजार रहा। विद्यार्थियों ने देहरादून के पुराने व्यापारिक केंद्र के रूप में पल्टन बाजार की भूमिका, बाजार संस्कृति तथा समय के साथ शहर में आए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों को समझा। बाजार की ऐतिहासिक पहचान और स्थानीय जीवन में इसके महत्व से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।
इसके बाद विद्यार्थियों को मिशन स्कूल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, शिक्षा के क्षेत्र में इसके योगदान तथा देहरादून में आधुनिक शिक्षा के विकास से इसके संबंध के बारे में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने विद्यालय की पुरानी वास्तुकला और शैक्षिक विरासत को भी करीब से देखा।
इसके साथ ही मार्ग में पड़ने वाले सरनिमल बाजार, धामावला, बाबूगंज बाजार, पीपल मंडी और लक्ष्मीनारायण मंदिर के इतिहास के बारे में भी जानकारी दी गई ।
इसके बाद प्रतिभागी दर्शनी गेट पहुंचे। यहां विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक गेट की संरचना और इसके महत्व को समझा। गाइड विजय भट्ट द्वारा विद्यार्थियों को पुराने देहरादून के स्वरूप तथा ऐतिहासिक प्रवेश द्वारों की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। सन 1823 ईस्वी को मैदानी भाग से जोड़ने वाली पहली सड़क, रुड़की- देहरा- राजपुर रोड के विषय में बताया.
हेरिटेज वॉक का अंतिम पड़ाव गुरु राम राय दरबार साहिब रहा। पुजारी श्री मैथाणी द्वारा विद्यार्थियों को दरबार साहिब के ऐतिहासिक परिसर, इसकी वास्तुकला, झंडा साहिब, दरबार हॉल तथा परिसर में स्थित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन किया गया और दरबार साहिब के इतिहास तथा देहरादून के विकास में इसके महत्व के बारे में जानकारी दी गई । गाइड विजय भट्ट द्वारा दरबार साहिब की दीवारों पर उकेरे हुए आकर्षक गढ़वाली और मुग़ल शैली के भित्तिचित्रों के विषय में भी विस्तार से बताया गया। ये भित्तिचित्र उत्तर भारत के साहित्य, संस्कृति और चित्रकला का उत्कृष्ट नमूना है। उनके द्वारा साल 1804 में गढ़वाल के राजा प्रद्युमन शाह और अमर बहादुर थापा के नेतृत्व में नेपाली सेना के साथ लड़े गए खुडबुडा युद्ध के बारे में भी चर्चा की गई । महाराज श्री देवेंद्र के निर्देश पर सभी को लंगर में सूक्ष्म जलपान कराया गया। इस अवसर पर
डायट के प्रवक्ता गिरीश थपलियाल द्वारा दरबार साहिब के सदस्यों से भ्रमण के संबंध में संवाद स्थापित किया गया ।

बकौल ऋचा जुयाल समन्वयक हेरिटेज वॉक, हेरिटेज वॉक के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और देहरादून के इतिहास, संस्कृति और विरासत को अनुभव के माध्यम से समझा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में स्थानीय विरासत के प्रति रुचि, इतिहास को जानने की जिज्ञासा तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में ऋचा जुयाल द्वारा सभी शिक्षक प्रतिभागियों, विजय भट्ट और पुजारी श्री मैथाणी और विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया गया। शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों द्वारा डायट देहरादून के नवाचारी कार्यक्रम हेरिटेज वॉक में दी गई जानकारी को ज्ञानवर्धक और रोचक बताते हुए फिर से अन्य वॉक में उनको आमंत्रित किये जाने के लिए निवेदन किया गया. वॉक में राजकीय इंटर कॉलेज डोभालवाला, पटेलनगर, खुड़बुड़ा, बंजारावाला, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कारगी, ब्रह्मपुरी, लक्खीबाग, राजपुर रोड और अजबपुर कला से विजयलक्ष्मी सेमल्टी, ममता जोशी, शर्मीला रावत, मनीषा जैन, सुमन, भावना गुसाईं, जयंती बुटोला, नीलम मिश्रा और स्मिता सेमवाल उपस्थित रहे।

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