डायट देहरादून में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्रवक्ताओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ शुरू

*समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जनपद देहरादून के भौतिक विज्ञान, भूगोल एवं अंग्रेजी विषय के प्रवक्ताओं के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम *
उत्तराखंड, देहरादून। जनपद देहरादून के भौतिक विज्ञान, भूगोल और अंग्रेजी विषय के 80 प्रवक्ताओं का
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन डायट देहरादून द्वारा किया जा रहा है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की विषयगत और शैक्षिक दक्षताओं का संवर्धन करते हुए विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार लाना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संस्तुतियों को कक्षा-कक्ष तक प्रभावी रूप से पहुँचाना तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए शिक्षकों को नएँ शैक्षिक दृष्टिकोणों से परिचित कराना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर डायट देहरादून के प्राचार्य गोविंद राम जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक केवल विषय-वस्तु का संप्रेषण करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, उनकी रचनात्मकता, जिज्ञासा, तार्किक चिंतन और जीवन कौशलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला मार्गदर्शक है।
उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को अपने-अपने विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जनपद देहरादून को शैक्षिक गुणवत्ता और उपलब्धियों के क्षेत्र में राज्य में उच्च स्थान पर स्थापित करने के लिए सभी शिक्षकों को एक टीम के रूप में समन्वित प्रयास करने होंगे। उन्होंने विद्यालय स्तर पर नवाचार, प्रभावी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष बल दिया।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपेक्षा की कि वे प्रशिक्षण को केवल औपचारिक गतिविधि न मानकर इसे अपने व्यावसायिक विकास और विद्यालयी गुणवत्ता सुधार का माध्यम बनाएँगे तथा प्रशिक्षण के पश्चात अपने विद्यालयों में सकारात्मक परिवर्तन के लिए ठोस पहल करेंगे।
प्रशिक्षण के अगले सत्र में संदर्भदाता डॉ. विजय सिंह रावत द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रमुख अवधारणाओं, उद्देश्यों और विद्यालयी शिक्षा में इसके महत्व पर प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित किया।
डॉ. रावत ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को अधिक समग्र, समावेशी, गुणवत्तापूर्ण, कौशल-आधारित, विद्यार्थी-केंद्रित तथा अनुभवात्मक बनाना है। उन्होंने 5+3+3+4 शैक्षिक संरचना, बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान, दक्षता-आधारित शिक्षण-अधिगम, बहुविषयक दृष्टिकोण, व्यावसायिक शिक्षा तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास जैसे महत्वपूर्ण पक्षों पर चर्चा की।
उन्होंने बालवाटिका एवं विद्यालयी शिक्षा के लिए राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के विभिन्न पक्षों से प्रतिभागियों को अवगत कराया तथा पाठ्यचर्या को स्थानीय संदर्भ, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और अनुभवों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि पाठ्यचर्या का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक की विषय-वस्तु पूर्ण करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अपेक्षित दक्षताओं, कौशलों, मूल्यों और दृष्टिकोणों का विकास करना है।
इसी सत्र में व्यावसायिक शिक्षा की अवधारणा और वर्तमान विद्यालयी शिक्षा में उसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा की गई। डॉ. रावत ने बताया कि विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए उन्हें विभिन्न कौशलों और व्यावसायिक क्षेत्रों से परिचित कराना आवश्यक है। व्यावसायिक शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा के साथ जोड़कर विद्यार्थियों में कौशल, रोजगारपरकता, आत्मनिर्भरता, उद्यमशीलता तथा कार्य के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जा सकती है।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपेक्षा की कि वे अपने विषयों के शिक्षण में स्थानीय संसाधनों, गतिविधियों, परियोजना कार्य और व्यावहारिक अनुभवों को समुचित स्थान देकर विद्यार्थियों के सीखने को अधिक अर्थपूर्ण बनाएँ ।
मध्याह्न भोजन के बाद आयोजित सत्र में बतौर संदर्भदाता डॉ. विजय सिंह रावत द्वारा प्रतिभागियों के साथ सामुदायिक सहभागिता, विद्यालय विकास योजना, जनसंपर्क और हितधारकों की सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा-परिचर्चा की गई।
डॉ. रावत ने बताया कि विद्यालय की गुणवत्ता में सुधार केवल विद्यालय और शिक्षकों के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें अभिभावकों, समुदाय, विद्यालय प्रबंधन समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पूर्व छात्रों तथा अन्य हितधारकों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
उन्होंने विद्यालय विकास योजना को विद्यालय की वास्तविक आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति तथा स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित बनाने पर बल दिया। प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि प्रभावी विद्यालय विकास योजना के निर्माण और क्रियान्वयन में सामुदायिक सहभागिता, आवश्यकता-आधारित योजना, प्राथमिकता निर्धारण, संसाधनों का समुचित उपयोग तथा नियमित अनुश्रवण महत्वपूर्ण घटक हैं।
जनसंपर्क के संदर्भ में विद्यालय और समुदाय के बीच सकारात्मक तथा विश्वसनीय संबंध स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया। प्रतिभागियों से चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि विद्यालय की उपलब्धियों, नवाचारों और विद्यार्थियों की प्रगति को समुदाय के साथ साझा करने से विद्यालय के प्रति विश्वास और सहयोग की भावना विकसित होती है।
सत्र के दौरान विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया कि वे विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के साथ-साथ समुदाय में उपलब्ध मानवीय, भौतिक और स्थानीय ज्ञान-संसाधनों का भी उपयोग करें।
चर्चा के माध्यम से यह निष्कर्ष सामने आया कि यदि विद्यालय, अभिभावक और समुदाय एक साझा उद्देश्य के साथ कार्य करें तो विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में अपेक्षित सुधार लाया जा सकता है। इस के लिए विद्यालयों में संवाद, बैठक, अभिभावक सहभागिता, सामुदायिक गतिविधियों एवं स्थानीय संसाधन व्यक्तियों की सहभागिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में कार्यक्रम समन्वयक श्रीमती प्रियंका तोमर द्वारा शिक्षक आचरण संहिता के संबंध में प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। उन्होंने शिक्षक के व्यावसायिक दायित्वों, कर्तव्यों, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और विद्यालयी वातावरण में शिक्षक के आदर्श आचरण के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि शिक्षक का आचरण विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और विद्यालयी वातावरण को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। अतः शिक्षक से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ करे।
प्रतिभागिता एवं प्रशिक्षण का निष्कर्ष :
उक्त तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद देहरादून के भौतिक विज्ञान, भूगोल एवं अंग्रेजी विषय के कुल 80 प्रवक्ताओं द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता रही। विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान के साथ-साथ संवाद, चर्चा एवं परिचर्चा के माध्यम से प्रशिक्षण को सहभागितापूर्ण एवं प्रभावी बनाया गया।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस प्रतिभागियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा, व्यावसायिक शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता, विद्यालय विकास योजना, जनसंपर्क, हितधारकों की सहभागिता तथा शिक्षक आचरण संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
प्रशिक्षण से अपेक्षा की गई कि प्रतिभागी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना एवं प्रावधानों को विद्यालयी संदर्भ में प्रभावी रूप से लागू कर सकेंगे।
दक्षता-आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण को बढ़ावा देंगे।
राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएँगे।

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