उत्तराखंड, देहरादून। सरकार की योजनाओं को आम जन तक पहुंचाने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक ‘फस्ट लाइन ऑफ़ डिफेन्स ‘ की तरह हैं। यह बात प्राचार्य डायट देहरादून गोविन्द राम जायसवाल ने कही। वह कक्षा 10 में कौशलम पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए डायट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कौशलम कार्यक्रम प्रयोगात्मक पक्ष पर आधारित रोचक कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत शिक्षकों को बच्चों से प्राप्त आईडिया को प्रोत्साहित करना चाहिए और बच्चों के कौशलों की पहचान की जानी आवश्यक है। समापन सत्र का संचालन करते हुए ऋतु कुकरेती ने बताया कि जनपद देहरादून के 154 स्कूल कौशलम कार्यक्रम से आच्छादित हैं। इनमें से 84 इंटर कॉलेज और शेष हाई स्कूल हैं। तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सन्दर्भ दाता के रूप में डॉ. उमेश चमोला, मीनाक्षी दुबे, बलविंदर कौर, गीता उनियाल, सुनीता सकलानी और देवेंद्र सगोई के साथ ही उद्यम फाउंडेशन की विशेषज्ञ ममता खत्री और यामिनी ने भी योगदान दिया।
प्रशिक्षण में सन्दर्भदाताओं ने कौशलम कार्यक्रम की अवधारणा, उद्यमशील मानसिकता, इक्कीसवीं सदी के कौशल, कौशलम प्रगति पत्र, जॉब एक्सपलोरेशन आदि बिंदुओं पर प्रतिभागी शिक्षकों को जानकारी दी। शिक्षकों द्वारा विभिन्न सत्रों से संबंधित गतिविधियों को प्रस्तुत किया. समापन सत्र में कौशलम कार्यक्रम समन्वयक गिरीश थपलियाल और डॉ. विजय रावत ने भी विचार व्यक्त किए।

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शिक्षक ‘फस्ट लाइन ऑफ़ डिफेन्स ‘ की तरह हैं : गोविन्दराम जायसवाल
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