उत्तराखंड, देहरादून। डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ रचना संसार सभागार, देहरादून में सौं-करार टिरि (लोकभाषा साहित्यिक समिति पंजी.) के संस्थापक अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ के सौजन्य और सहयोगी संस्था हिमालय विरासत न्यास, उत्तराखण्ड के सहयोग से गढ़वाली भाषा साहित्य के प्रचार-प्रसार विकास के लिए मातृभषा आन्दोलन के रूप में गढ़वाली कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न जनपदों से आए कवियों ने अपनी-अपनी कविताओं का पाठ किया और तालियां बटोरी।मुख्य अतिथि साहित्यकार रमाकांत बेंजवाल, विशिष्ट अतिथि ओमप्रकाश सेमवाल, कार्यक्रम अध्यक्ष मदन मोहन डुकलाण संस्था के अध्यक्ष अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’और वरिष्ठ कवयित्री नीता कुकरेती ने द्वीप प्रज्ज्वलित कर इस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। सुरेश स्नेही ने तौं कुकुर-बिराळौं ना पाळा धौं, मदन डुकलाण ने तु रूसै गै, ओमप्रकाश सेमवाल ने तेरा असमानी गैंणा मुल-मुल हैंसदी रौ, नीता कुकरेती ने रूमक होंदी घौरक पैटद, शांति प्रकाश ‘जिज्ञासु ने जिन्दगी का टैर, शशि देवली ने पहाड़ कि खैरि, बेलीराम कंसवाल ने पुराणु लम्पू, दीपक सती ‘प्रसाद’ ने पलायन पर आधारित गौं मा जौं त कनकै जौं? रीख चारौं ओर च, सतपाल ने हमारू पहाड़ गढ़वाली भाषा के महत्व पर, शिव दयाल ‘शैलज’ ने गजल-जौंका खुट्टा नि छन वो घूंडो का सारा छन, मधुरवादिनी तिवारी ने नौनी पर आधारित रचना, सुशील चन्द्रा ने व्यंग्य -विकास ह्वे त ग्याई जैसे जथगा छै उथगा कै त ग्याई, मनोज भट्ट गढ़वाली ने असमानी जोन, चन्द्र दत्त सुयाल ने देरादूण रैण लैक नि रै चै -तरफी भीड़ देखी ल्या, नैना कंसवाल ने बदलते सामाजिक परिवेश पर, बृजपाल ने पहाड़ का मनखि पहाड़ आला जरूर, जगमोहन जयाड़ा ‘जिज्ञासु’ ने व्यंग्य एक गौं का तीन प्राणी, हरीश बडोनी ने बाघ-कथा-काणी रात ब्याणी, सिद्धि डोभाल ने समाज पर आधारित रिद्धि भट्ट ने-त्वे से हि चलणी सरकार एक से बढ़कर शानदार रचनाएं सुनाई। कार्यक्रम के अध्यक्ष मदन मोहन डुकलाण ने कहा कि, कविता के बारे में अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ सौं-करार के माध्यम से प्रदेश में एक साहित्यिक माहौल बना रहे हैं अब लग रहा है कि, गढ़वाली कविता का विकास सही दिशा में हो रहा है।
वरिष्ठ साहित्यकार देवेश जोशी ने कहा कि कविता किलै? का सवाल कवि के भीतर होना ही चाहिए। इस काम में अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ लगे हुए है। वहीं साहित्यकार रमाकांत बेंजवाल ने कहा कि कवियों को मंचीय कविताओं के अलावा पुस्तकीय/विशुद्ध साहित्यिक कविताओं पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे साहित्य का असली विकास होगा। कार्यक्रम मेें साहित्यकार गिरीश बडोनी, शिक्षक गम्भीर सिंह, शिव दयाल चौधरी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि शांति प्रकाश ‘जिज्ञासु’ ने किया।
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सौं करार टीरी ने आयोजित की गढ़वाली कवि गोष्ठी
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