उत्तराखंड, देहरादून। 2 दिसंबर से 6 दिसंबर 2025 तक एस, सी, ई, आर, टी, उत्तराखंड देहरादून के सभागार में डिजिटल कॉन्टेंट रिकॉर्डिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
में दिए निर्देशों के अनुरूप
लोक संस्कृति का संरक्षण करते हुए
संगीत शिक्षा के सैद्धांतिक पक्ष के सरलीकरण के लिए डिजिटल कॉन्टेंट बनाकर रिकॉर्डिंग करना था। कार्यशाला समन्वयक
डॉ ऊषा कटियार ने स्पष्ट किया कि संगीत मनुष्य में निहित आंतरिक प्रवृत्तियों का मनोहारी रूप है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस का उद्घाटन सरस्वती पूजन और मनोज थापा द्वारा राग मियां मल्हार की प्रस्तुति ‘रख लाज मेरी गणपति’ से की गई। इस अवसर पर डॉ कृष्णानन्द बिजल्वाण सहायक निदेशक, एस. सी. ई. आर. टी उत्तराखंड ने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला में उपयोगी कंटेंट का निर्माण होगा। रंगमंच के प्रतिष्ठित कलाकार राजकमल,उज्ज्वल सपने ने भी विचार व्यक्त किए। डॉ ऊषा कटियार कार्यक्रम समन्वयक ने परिचय सत्र के पश्चात संगीतिका डिजिटल कॉन्टेंट रिकॉर्डिंग कार्यशाला के उद्देश्य और कार्यक्रम प्रारूप पर प्रकाश डालते हुए स्क्रिप्ट में समस्त कलाकारों और विद्यार्थियों की भूमिका को समझाने और अभिनय,गायन, वादन,के अनुरूप प्रतिभागियों को समूहों में बांटा। राजकमल रंगकर्मी ने रंगमंच की बारीकियों तथा प्रतिभागियों को प्रदर्शन के तत्व जैसे पात्र, विचार,संवाद, शैली, कथानक, नाटक में संगीत एवं राग व ताल के महत्व,जैसे दृश्य ध्वनि का प्रभाव, दर्शकों का मार्ग दर्शन, विषयवस्तु को या कहानी को आगे बढ़ाना पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। कार्यशाला में संगीत कलाकारों और विद्यार्थियों को पात्र की प्रवृत्ति के अनुरूप अभिनय का अभ्यास, संवाद अदायगी कराई गई।डॉ बिजल्वाण सहायक निदेशक एस,सी, ई, आर, टी ने स्पष्ट किया कि संगीत विषय में यह प्रथम प्रयोग है जो न केवल संगीत के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानो में सहायक सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाएगा बल्कि एन,ई पी,2020 की मंशा के अनुरूप विद्यार्थियों में रचनात्मकता और संवेदनशीलता को विकसित करने का काम करेगा।
कौशल विकास हेतु वर्चुअल लैब के माध्यम को प्रभावशाली कॉन्टेंट की दिशा में यह प्रयास सराहनीय है।
डॉ हिमांशु और पुष्पिंदर ने लय और ताल को सरलतम रूप से प्रस्तुत किया और दादरा और कहरवा को समझाया ।
डॉ ऊषा कटियार ने कहा कि संगीत मनुष्य को मनुष्य बनाने की बहुमूल्य औषधि हैं जो प्रथम चरण में संस्कार के रूप में अपनाई जानी चाहिए।
एन, सी, ई, आर,टी,नई दिल्ली की प्रकाशित कक्षा 6 की कृति पुस्तिका सभी विद्यार्थियों में कलाओं के चार पहलू चित्रकला, संगीत के अंतर्गत गायन, वादन, नृत्य, रंगमंच, की विषय वस्तु और संस्कृति विविधता को प्रस्तुत किया गया है।
कार्यशाला में स्क्रिप्ट के अनुरूप अभिनय , गायन, वादन,की रिकार्डिंग की गई जिसमें डॉ हिमांशु जोशी, मनोज थापा, विक्रम सिंह, पुष्पिंदर सिंह तबला, आशा भट्ट के भगीरथ, तनीषा, शिवा, प्रिया थापा, ने अपन सहयोग प्रदान किया। डॉ बिजल्वाण सहायक निदेशक के हाथों से सभी कलाकारों और विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट वितरित किए गए । ऑक्टिव स्टूडियो देहरादून में रिकॉडिंग का अनुभव विद्यार्थियों के लिए बेहद रोमांचक रहा।






