बी. आर. पी. और सी. आर. पी. का दो दिवसीय प्रशिक्षण डायट देहरादून ने किया आयोजित

उत्तराखंड, देहरादून। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत शिक्षक शिक्षा के तहत स्कूल पूर्व शिक्षा (Early child care Education ) के संदर्भ में बी.आर.पी. और सी.आर.पी. का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान देहरादून में दिनांक 24 एवं 25 अगस्त 2026 को आयोजित किया गया। पहले दिन (24 अगस्त 2026) का प्रारम्भ पंजीकरण, उद्घाटन, प्रतिभागियों के परिचय तथा प्री-टेस्ट से हुआ। प्रशिक्षण के उदघाटन सत्र में डायट प्राचार्य हेमलता गौड़ उनियाल ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के उद्देश्यों से अवगत कराया । उनके द्वारा प्रतिभागियों को स्कूल पूर्व शिक्षा एवं प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की अवधारणा, दक्षता आधारित आकलन तथा बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान से संबंधित प्रभावी गतिविधियों से परिचित कराया गया ।
इसके बाद कार्यक्रम समन्वयक डां. विजय सिंह रावत द्वारा स्कूल पूर्व शिक्षा/प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा तथा प्रारम्भिक बाल्यावस्था में बच्चे के समग्र विकास के लक्ष्यों और आयामों पर चर्चा की गई। संदर्भदाता संध्या कठैत ने प्रशिक्षण में कहानी, चित्र-पठन, बालगीत तथा खेलों के माध्यम से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया । साथ ही बुनियादी साक्षरता के विभिन्न घटकों—ध्वनि जागरूकता, शब्द भंडार, वर्ण डिकोडिंग, धारा प्रवाह पठन और लेखन—पर गतिविधि आधारित कार्य कराया गया। बिपिन भट्ट ने प्रतिभागियों को विद्यालय और बालवाटिका केंद्र में किए जाने वाले अनुश्रवण तथा अनुसमर्थन के बारे में जानकारी दी गई। दीपिका पंवार द्वारा स्कूल पूर्व शिक्षा में संख्यात्मकता और संख्या पूर्व अवधारणाओं जैसे पैटर्न, वर्गीकरण, संख्या पहचान और संख्या लेखन पर भी अभ्यास कराया गया।
दूसरे दिन (25 अगस्त 2026) को प्रशिक्षण की शुरुआत करते हुए शिशुपाल विष्ट ने दक्षता आधारित आकलन के संदर्भ में विस्तृत चर्चा की। इनके द्वारा परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 और इस सर्वेक्षण में जनपद देहरादून की कक्षावार प्राप्त दक्षताओं के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी गई । प्रणय बहुगुणा ने प्रतिभागियों को खेल-खिलौनों और अधिगम सामग्री, विशेषकर ‘जादुई पिटारा’ के उपयोग से परिचित कराया गया। संध्या कठैत ने स्कूल पूर्व शिक्षा एवं प्रारम्भिक बाल्यकाल में आकलन की प्रक्रिया तथा बच्चों की सीखने की प्रगति को समझने के तरीकों पर चर्चा की गई। शशिलता पोखरियाल द्वारा कहानी, कविता, भावगीत पर प्रतिभागियों के साथ गतिविधि कराई। अंतिम सत्र में डां. रावत ने बाला और सुरक्षित आंगनवाड़ी, आनन्दम पाठ्यचर्या तथा आंगनवाड़ी के अनुभवों से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों द्वारा पोस्ट टेस्ट दिया गया।
समग्र रूप से प्रशिक्षण गतिविधि आधारित, सहभागितापूर्ण तथा दक्षता-केंद्रित रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से बी.आर.पी. और सी.आर.पी. को विद्यालय और आंगनवाड़ी स्तर पर स्कूल पूर्व शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, बच्चों के समग्र विकास को समझने, उपयुक्त अधिगम सामग्री का प्रयोग करने तथा प्रभावी आकलन एवं अनुश्रवण करने के लिए आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।
प्रशिक्षण में डॉ. विजय सिंह रावत, प्रणय बहुगुणा, संध्या कठैत, दीपिका पंवार, विपिन भट्ट, शिशुपाल सिंह विष्ट और शशिलता पोखरियाल द्वारा विभिन्न सत्रों में सन्दर्भदाता के रूप में भाग लिया गया।

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