उत्तराखंड, अगस्त्यमुनि। जनपद रूद्रप्रयाग के वीरों देवल गाँव में बहिन वृक्ष योजना एक अभियान के रूप में चल रही है। न्यूज ओसियन को जानकारी देते हुए आश संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी ने बताया कि
प्रकृति मानव जीवन का आधार है। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई ने पर्यावरण संरक्षण को अत्यंत आवश्यक बना दिया है। ऐसे समय में “बहिन वृक्ष योजना” एक प्रेरणादायी और जनभागीदारी पर आधारित अभियान है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है बल्कि महिलाओं को प्रकृति से जोड़कर सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को पौधे भेंट किए जाते हैं और उन्हें अपनी बहन के समान स्नेह, संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प दिलाया जाता है। प्रत्येक पौधा हरियाली, जीवन, प्रेम और भविष्य की आशा का प्रतीक बनता है। जब एक महिला किसी पौधे को अपनाती है, तो वह केवल एक वृक्ष नहीं लगाती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित भविष्य की नींव रखती है। श्री चौधरी ने बताया कि इस
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएँ , शिक्षक, स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं । पौधों का वितरण, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प इस अभियान की सफलता को दर्शाता है। आश संस्था के संस्थापक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक श्री नरेंद्र प्रसाद गोस्वामी ने बताया कि यह योजना 25 जुलाई 2010को शुरू की गई थी जिसमें बहिनों को 05-05 फलदार व अन्य पौध रक्षाबंधन के उपहार स्वरूप भेंट किए जाते हैं। रक्षाबंधन पर बहिनें उन पौधों पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा का संकल्प भी लेती हैं राजेन्द्र चौधरी द्वारा अवगत कराया गया कि इस कार्यक्रम के संयोजक नरेन्द्र प्रसाद गोस्वामी के
मार्गदर्शन और महिला मंगल दलों तथा विद्यालय परिवार के सहयोग से यह आयोजन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है.
बहिन वृक्ष योजना केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक जनआंदोलन है। यह अभियान हमें सिखाता है कि जिस प्रकार हम अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल करते हैं, उसी प्रकार वृक्षों का संरक्षण भी हमारा नैतिक दायित्व है।






