उत्तराखंड,चंपावत। डायट लोहाघाट, जनपद चंपावत में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया, ‘शिक्षा के बदलते परिदृश्य एवं नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता’ विषय पर केंद्रित इस संगोष्ठी में यह विचार सामने आया कि आधुनिक शिक्षा का भविष्य तकनीक से नहीं, बल्कि तकनीक और नैतिकता के संतुलन से तय होगा। समापन में मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी ने कहा कि नई पीढ़ी जिस डिजिटल क्रांति के बीच पनप रही है, वहाँ मूल्य, मानवीयता, सहानुभूति, ईमानदारी और जिम्मेदारी और भी अधिक अनिवार्य हो जाते हैं। मुख्य संयोजक डॉ लक्ष्मी शंकर यादव ने कहा कि शिक्षा केवल ‘स्किल’ तक सीमित हो जाए, यह राष्ट्रीय विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा आज का शिक्षा विमर्श इस बात पर सहमत दिखा कि ज्ञान और टेक्नोलॉजी तभी सार्थक हैं, जब वे समाज में संवेदनशीलता और नैतिक चेतना को मजबूत करें।
सह संयोजक डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि इस संगोष्ठी ने विचार मंथन के माध्यम से एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया कि क्या हम केवल आधुनिक हो रहे हैं या बेहतर भी बन रहे हैं? उन्होंने कहा कि उत्तर खोजने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा की ओर कदम बढ़ाना होगा।
सेमिनार के दौरान प्रस्तुत शोधों ने शिक्षण के नए मॉडलों, एआई की उपयोगिता, छात्रों के भावनात्मक विकास और भारतीय शिक्षा दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिए। संचालक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा किसी ‘अलग अध्याय’ की तरह नहीं, बल्कि संपूर्ण शिक्षण अधिगम की आत्मा की तरह होनी चाहिए। समस्त शोधकों को सम्मानित किए जाने के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।
इस संगोष्ठी में यह सार व्यक्त हुआ कि
तकनीक गति दे सकती है, पर दिशा हमेशा मूल्य ही तय करते हैं। यदि शिक्षा में यह संतुलन बना रहे, तो एक उज्ज्वल, संवेदनशील और सशक्त भारत का निर्माण निश्चित है।
राष्ट्रीय सेमिनार के समापन सत्र में मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथितियों ने इस राष्ट्रीय आयोजन को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के प्रतिनिधि थानाध्यक्ष अशोक कुमार सहित समस्त अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार समाज को एक नई दिशा और दशा प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय सेमिनार ऑनलाइन तथा ऑफलाइन हाइब्रिड मोड में संचालित किया गया जिसमें 350 से अधिक शोधपत्र प्राप्त हुए हैं। दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में 100 से अधिक प्रोफेसर, शोधार्थी और शिक्षकों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। समापन सत्र का संचालन संयोजक डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव, शिवराज सिंह तड़ागी तथा प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने किया।
प्रभारी प्राचार्य दिनेश सिंह खेतवाल तथा अन्य संकाय सदस्यों की अध्यक्षता में देशभर के प्रमुख प्रख्यात शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने उत्कृष्ट शोध पत्र प्रस्तुत किए। समस्त शोध पत्र प्रस्तुतकर्ताओं, शोधार्थियों तथा प्रतिभागियों को जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी एवं अन्य अतिथियों द्वारा स्मृति चिह्न एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्राचार्य मान सिंह, दिनेश सिंह खेतवाल, आशुतोष वर्मा, डॉ अनिल कुमार मिश्रा, डॉ पारुल शर्मा, दीपक सोराडी, डॉ अवनीश कुमार शर्मा, कृष्ण सिंह ऐरी, शिवराज सिंह तड़ागी, मनोज भाकुनी, नवीन उपाध्याय, डॉ कमल गहतोड़ी, राम बालक मिश्रा, अखिलेश श्रीवास्तव, डॉ नवीन जोशी आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। अभिलेखीकरण एवं अन्य व्यवस्थाओं में राखी गहतोड़ी, जानकी चतुर्वेदी, रज्जन कफल्टिया, पूनम त्रिपाठी, हेमा जोशी, नरेश जोशी, गिरीश चंद्र जोशी,भुवन चंद्र दुमका, मधु कलौनी, रीता पाण्डे सहित समस्त डीएलएड प्रशिक्षुओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।






