उत्तराखंड, देहरादून।वर्तमान दूर संचार क्रांति के युग में वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ही लोक गीतों का संरक्षण भी आवश्यक है। यह विचार साहित्यकार डॉ. उमेश चमोला ने अल्मोड़ा से प्रकाशित बाल प्रहरी पत्रिका द्वारा आयोजित ऑन लाइन लोकगीत गायन कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि लोकगीत न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं अपितु हमारे लोक इतिहास, हमारे समाज, तीज त्यौहार, समय -समय पर हुए आंदोलन के बारे में जानकारी देते हैं। बाल प्रहरी के इस 1349 वें ऑनलाइन कार्यक्रम का संचालन वीर शिवा पब्लिक स्कूल चौखुटिया अल्मोड़ा के कक्षा 2 के छात्र प्रभाष देवतला ने किया। कार्यक्रम में योगिता जोशी, मंत्रिता शर्मा, हिमांशी आर्या, संस्कृति उपाध्याय, ईशा धोनी, तेजस्विनी, दृश्या कोहली, मानस धोनी, यथार्थ उपाध्याय और माही जोशी ने लोकगीतों को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आकाश सारस्वत, प्राचार्य डायट गौचर चमोली ने बाल प्रहरी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति के आधार होते हैं। उन्होंने व्यसनमुक्त और चरित्रवान नागरिक बनने का बच्चों का आह्वान किया। अहमदाबाद से श्री श्याम पलट पाण्डे ने बच्चों की प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राजस्थान से अशोक कुमार नेगी ने कहा कि इन कार्यक्रमो के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक मंच मिलता है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकीय इंटर कॉलेज खुनोली बागेश्वर की कक्षा 11 की छात्रा महिमा धौनी ने भाग लिया और अध्यक्षता वीर शिवा पब्लिक स्कूल चौखुटिया अल्मोड़ा की छात्रा वंशिका राजपूत ने की। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम के संयोजक उदय किरोला सम्पादक बाल प्रहरी ने सभी उपस्थित लोगों को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम का समापन किया।
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