उत्तराखंड, देहरादून,राजकीय इंटर कालेज माजरीमाफी डोईवाला में पुस्तको की समीक्षा (मैने क्या सीखा) के तहत बच्चों ने पुस्तक मेले में जो भी किताबें पुस्तकालय से ली थी उनकी समीक्षा के अन्तर्गत अपने-अपने अनुभव शेयर किए। ज्ञात हो कि 26 मई 2025 को विद्यालय में बस्ता रहित दिवस के अवसर पर पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था। इस मेले में बच्चों ने अपनी रुचि के हिसाब से पढ़ने के लिए पुस्तकों और पत्र -पत्रिकाओं का चयन किया था। आज विद्यालय में इन पुस्तकों और पत्र -पत्रिकाओं की बच्चों ने समीक्षा कर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। विद्यालय के शिक्षक राजेंद्र चौधरी ने न्यूज ओसियन को बताया कि बच्चों को पुस्तकों के महत्व को समझाते हुए विद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि
पुस्तकों के नियमित अध्ययन से न सिर्फ ज्ञान बढ़ता है, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता, शब्दावली और कल्पनाशक्ति भी विकसित होती है। यह मन को शांत करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।
किताबों की दुनिया” अपने आप में एक अनोखी और जादुई दुनिया होती है — जहाँ हर पन्ना एक नई कहानी कहता है, हर शब्द एक नई भावना जगाता है, और हर किताब एक नया अनुभव देती है।
यह दुनिया अकेलेपन में दोस्त बन जाती है, उलझनों में मार्गदर्शक, और खाली समय में सबसे अच्छा साथी।
इस अवसर पर बच्चों ने अलग-अलग प्रकार की किताबों की समीक्षा की जिनमे
प्रेरणादायक / आत्मविकास, वैज्ञानिक,
साहित्य / उपन्यास (हिंदी):/
अंग्रेज़ी साहित्य:दार्शनिक /आध्यात्मिक , प्रतियोगी परीक्षाओं मे सफलता के लिए विभिन पत्रिकाएँ आदि पर अपने विचार प्रस्तुत किये।
प्रधानाचार्य डा. के. के मिश्रा ने बच्चो को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तकों को पढने की हमे नियमित आदत बनानी चाहिए। इसके लिए हमारे विद्यालय में पुस्तकालय उपलब्ध है। बच्चे उसका लाभ ले सकते हैं। पुस्तकालय प्रभारी इंदिरा साहू ने आशा व्यक्त की कि पुस्तक मेले में बच्चों ने जिस उत्साह से भाग लिया,उसी तरह से यह उत्साह आगे भी बना रहेगा और विद्यालय में इस प्रकार के आयोजन नियमित होते रहेंगे । इस अवसर पर राजेश गैरोला, आशा बुटोला, पुष्पलता रावत,रचेन्द्र सेमवाल,प्रमुख रूप से मौजूद थे । कार्यक्रम का संचालन महावीर प्रसाद पूर्वाल ने किया।
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बच्चों ने पुस्तकों के बारे में अपने अनुभव साझा किए
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