उत्तराखंड, देहरादून। गणित शिक्षण में दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों और अनुभवों का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करने से न केवल गणित विषय के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ेगी बल्कि गणित के प्रति उनका भय भी दूर होगा । यह बात बंदना गर्बयाल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड देहरादून ने एस. सी. ई. आर. टी. उत्तराखंड के शैक्षिक शोध, सर्वे और मूल्यांकन विभाग द्वारा आयोजित गणित विषय की राज्य संसाधन समूह प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन सत्र में कही। एस. सी. ई. आर. टी. उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने कहा कि गणित शिक्षण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में वर्णित कौशलों का समावेश किया जाना आवश्यक है। 
सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद बिजलवाण ने कहा कि जब बच्चे की गणित की अवधारणाओं के प्रति समझ बनती है तो वह दैनिक जीवन में गणित का कुशलता से प्रयोग करता है। 
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मनोज कुमार शुक्ला ने न्यूज ओसियन को जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यशाला में कुल 40 शिक्षकों ने भाग लिया। डॉ. शुक्ला ने यह भी बताया कि हर डायट में जिला संसाधन समूह गठित किया गया है जो जनपद की आवश्यकताओं के अनुरूप गणित में नवाचारी प्रयासों पर चिंतन करता है। इस कार्यशाला में हर डायट द्वारा जिला संसाधन समूह के अंतर्गत किए गए कार्यों को साझा किया गया. डॉ. शुक्ला द्वारा कार्यशाला में एन. ई. पी. 2020 के सन्दर्भ में गणित में अनुभव आधारित शिक्षण पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। डॉ. अंजुलि सुहाने, एसोसिएट प्रोफेसर स्कूल ऑफ़ एजुकेशन इग्नू नई दिल्ली ने गणित शिक्षण में आई सी टी, आर. आई. भोपाल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अश्विनी गर्ग ने गणित शिक्षण की विभिन्न विधियां और गणित शिक्षण में खेल और दून स्कूल देहरादून के चंदन सिंह घुघत्याल ने गणित में नवाचारी आकलन विषय पर रोचक गतिविधियाँ कराईगई। अपर निदेशक एस. सी. ई. आर. टी. हरियाणा डॉ. सुनील बजाज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सन्दर्भ में गणित में 21 वीं सदी के कौशलों का समावेश विषय पर शिक्षकों से संवाद किया। Report by – Dr. Umesh Chamola
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एस. सी. ई. आर. टी. उत्तराखंड द्वारा आयोजित राज्य संसाधन समूह कार्यशाला हुई सम्पन्न
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