डायट भीमताल में मनाया गया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

† विज्ञान मेले के साथ मनाया गया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

उत्तराखंड,नैनीताल। कबाड़ समझी जाने वाली अनुपयोगी वस्तुओं से तैयार विज्ञान मॉडलों की प्रदर्शनी के साथ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महरागाँव के बच्चों ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आयोजित कर दर्शकों का दिल जीत लिया। विद्यालय के कक्षा 6 से 8 के 60 बच्चे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) भीमताल के विज्ञान गतिविधि केंद्र द्वारा आयोजित चार दिवसीय अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे थे। 25-28 फरवरी को आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों ने अपने विज्ञान पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न अवधारणाओं पर निष्प्रयोज्य वस्तुओं से 30 से अधिक वर्किंग मॉडल बनाए। कार्यशाला के अंतिम दिन 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर बच्चों ने अपने हाथों से बने इन मॉडलों का एक भव्य विज्ञान मेले के रूप में प्रदर्शन किया। ये मॉडल न्यूटन के नियम, संतुलन, हवा के दाब, प्रकाश, चुम्बकत्व, खगोलविज्ञान तथा शरीर की कार्यप्रणाली से संबंधित अवधारणाओं पर आधारित थे। कार्यशाला के पहले दो दिनों में प्रतिभागियों ने मॉडलों को तैयार किया, तीसरे दिन उन के पीछे छिपे सिद्धांतों पर चर्चा की और चौथे व अंतिम दिन विज्ञान मेले के रूप में अपने-अपने मॉडलों का प्रदर्शन किया।
विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए एन.सी.टी.ई. दिल्ली की कोऑर्डिनटर डॉ. शुभा मिश्रा ने बच्चों के प्रदर्शन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके अलावा एन.सी.टी.ई. दिल्ली की टीम के अन्य सदस्यों- डॉ. जगमोहन साहू, डॉ. टी. पांडेय, हिना जोशी, गोपाल, राहुल रॉय, ब्लॉक संसाधन केंद्र के अधिकारियों, विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रकाश सिंह नगदली, शिक्षक- डॉ. मधू साह, डॉ. ज्योत्सना चंदोला, एसएमसी अध्यक्ष माला देवी, डीएलएड प्रशिक्षु व अनेक अभिभावकों तथा निकटवर्ती विद्यालयों के बच्चों व शिक्षकों ने भी विज्ञान मेले का अवलोकन किया।
इस अवसर पर विज्ञान गतिविधि केंद्र के समन्वयक डॉ.शैलेन्द्र धपोला ने बताया कि डायट विगत वर्ष स्थापित विज्ञान गतिविधि केंद्र के माध्यम से जिले के विभिन्न विद्यालयों में सीधे बच्चों के साथ विज्ञान शिक्षण संबंधी नवाचारी प्रयोग संचालित कर रहा है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर इस चार दिवसीय बाल विज्ञान कार्यशाला के संयोजक डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी ने बताया कि अनुभव आधारित विज्ञान कार्यशालाएं बच्चों को ‘लर्निंग बाय डूइंग’ का मौका देती हैं। कक्षा में विज्ञान से भय खाने वाले बच्चे भी बड़े आत्मविश्वास से खुद को अभिव्यक्त कर पाते हैं। कार्यशाला में बाल विज्ञान खोजशाला समिति, बेरीनाग के संदर्भदाता विनोद उप्रेती, आशीष कांडपाल और आशुतोष उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।

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