उत्तराखंड, देहरादून। बाल विज्ञान प्रदर्शनी में मॉडल बनाने के लिए बच्चों को अवलोकन के अवसर दिए जाने चाहिए। बाल विज्ञान प्रदर्शनी का उद्देश्य विज्ञान को आम जन के बीच लोकप्रिय बनाना है। यह विचार डॉ. के. पी. शर्मा प्रोफेसर एन. सी. ई. आर. टी. नई दिल्ली ने एस. सी. ई. आर. टी. उत्तराखंड द्वारा आयोजित वैज्ञानिक लेखन कार्यशाला के दूसरे दिन समापन सत्र में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब भी बच्चों को व्यक्तिगत भ्रमण या शासकीय भ्रमण में जाने का अवसर मिलता है तो उन्हें पुस्तकालय या उच्च अध्ययन संस्थानों को अवश्य दिखाना चाहिए। इससे उनमे पठन पाठन की प्रवृत्ति का विकास होगा।
डॉ. कृष्णानन्द बिजलवाण सहायक निदेशक एस. सी. ई. आर. टी. उत्तराखंड ने कहा कि कार्यशालाएँ ज्ञान की साझेदारी का सशक्त माध्यम होती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी के लिए तैयार मॉडल पर आधारित संभावित प्रश्न मार्गदर्शक शिक्षकों द्वारा बच्चों से अवश्य बनाए जाने चाहिए।
कार्यशाला का संचालन करते हुए देवराज राणा ने कहा कि मॉडल के साथ भेजा जाने वाला विडिओ आकर्षक होना चाहिए। इसकी पृष्ठभूमि विषय के अनुरूप होनी चाहिए। दो दिवसीय इस कार्यशाला में उन मार्गदर्शक शिक्षकों को बुलाया गया था जिनके बच्चों के मॉडल राज्य स्तर पर चयनित हुए हैं और अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में सम्मिलित होने हैं। कार्यशाला में इनसे संबंधित राइट अप तैयार करने पर भी मंथन किया गया। कार्यशाला में राष्ट्रीय सन्दर्भदाता के रूप में डॉ. के. पी. शर्मा प्रोफेसर एन. सी. ई. आर. टी. नई दिल्ली ने बाल विज्ञान प्रदर्शनी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विज्ञान नाटिका के विभिन्न पक्षो के बारे में साहित्यकार और शिक्षक डॉ. उमेश चमोला ने प्रकाश डाला। कार्यशाला में सभी जिलों से 45 शिक्षकों ने भाग लिया। इस अवसर पर डायट उत्तरकाशी (बड़कोट) से डॉ. संजय भट्ट विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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विज्ञान मॉडल बनाने में बच्चों को अवलोकन के अवसर दिए जाने चाहिए -डॉ. के. पी. शर्मा
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