” तुमसे ही रंग जीवन में ”
शारदा प्रकाशित करो बुद्धि,
माॅं तिमिर भरे इस रण में।
वात्सल्यमयी हे करुणमूर्ति!
अब हूॅं तेरी ही शरण में।
हे विश्ववरा! शुभ्रावसना,
नित श्वेतजलज आसीना।
अज्ञानतिमिर का हरण करो,
मति विमल करो नवलीना।
हे वीणापाणि! नित मृदुल वाणी,
नव-नाद करो जन मन में।
जिसको सुनकर हों मुग्ध सभी,
छाए वसंत कण-कण में।
सुनकर वीणा आह्लादमयी,
खग-मृग सब हर्षित वन में।
माॅं धवलकीर्ति हे अमल मूर्ति,
ध्यावें तुमको सब मन में।।
तुमसे बसंत चहुॅं ओर सुखद,
तुमसे है रंग जीवन में,
अनुराग भरी माॅं कल्याणी,
रंग -प्रेम भरो कण-कण में।
ध्यावें ब्रह्मा ,अच्युत, महेश
आनंद प्रवाहित क्षण में,
माॅं वास करो अज्ञान भरे,
मेरे उर क्षण प्रति क्षण में।।
वसंत पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।💐💐💐
– रचनाकार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान नैनीताल भीमताल में हिन्दी विषय के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं
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