जैव विविधता और हरित विद्यालय के प्रति संवेदनशीलता विषय पर आयोजित हुई कार्यशाला

उत्तराखंड, नैनीताल,जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान भीमताल में आज तीन दिवसीय कार्यशाला ( 27-29 अक्टूबर 2025 तक) “जैव विविधता और हरित विद्यालय के प्रति संवेदनशीलता, औषधीय पौधों के केंद्र एवं किचन गार्डन की स्थापना” विषय पर प्रारंभ हुई। कार्यशाला का संचालन डॉ. पी. एस. मावड़ी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शक के रूप में मानसखंड विज्ञान केंद्र अल्मोड़ा के वैज्ञानिक डॉ. एस. सिंह सामंत उपस्थित रहे। उन्होंने हिमालयी पारितंत्र ,जैव विविधता , वनस्पति एवं जीव-जंतु तथा विलुप्त होती वनस्पति प्रजातियों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

डॉ. सामंत ने बताया कि जैव विविधता के संरक्षण हेतु अनेक वैज्ञानिक एवं सामुदायिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने भारतीय हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं, औषधीय पौधों (जड़ी-बूटियों) के महत्व तथा पारिस्थितिक निगरानी की विधियों पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य सुरेश चंद्र आर्य ने जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्थान में औषधीय पौधों की पौधशाला बनाई जाएगी। इस अवसर पर वरिष्ठ प्रवक्ता ललित प्रसाद तिवारी, डॉ. शैलेन्द्र धपोला, डॉ. संजय गुरुरानी, डॉ. पी. एस. बुगला, डॉ. राजेश जोशी, राजेश पांडेय, डॉ. हेमचंद्र तिवारी ,डॉ.आरती जैन सहित डी.एल.एड. प्रथम सेमेस्टर के सभी प्रशिक्षु उपस्थित रहे।

प्रथम दिवस के अंत में डॉ. पी. एस. मावड़ी द्वारा हर्बल गार्डन और किचन गार्डन की महत्ता पर चर्चा की गई। उन्होंने विद्यालय स्तर पर औषधीय पौधों की पहचान, रोपण एवं संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी से प्रकृति के संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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