राजा जी राष्ट्रीय उद्यान की गौहरी रेंज में भी है विंध्यवासिनी मंदिर

आप कभी जब ऋषिकेश में स्थित राजा जी राष्ट्रीय उद्यान की सैर के लिए आते हो तो आप इस उद्यान की गौहरी रेंज में स्थित विंध्यवासिनी मंदिर दर्शन के लिए भी आ सकते हैं। ऋषिकेश से 20 किमी दूर चीला से आगे सूखी नदी से चलते हुए बुकण्डी गाँव के पास  यह मंदिर स्थित है। मंदिर के नीचे तैड़ो और ताल नदियों का संगम है जो मिलकर बीण नदी कहलाती है। यहाँ आने के लिए आपको दो बातों का ध्यान रखना होगा। एक तो बरसात में यहाँ न आएँ क्योंकि इस समय ये मार्ग पूरी तरह बंद रहता है। दूसरा रात या देर शाम यहाँ गुलदार और टायगर हो सकते हैं। इसलिए दिन के समय यात्रा की जा सकती है। विंध्यवासिनी मंदिर भारत के कई स्थानों जैसे मध्य प्रदेश के विंध्य पर्वत और नेपाल में भी स्थित हैं। सभी मंदिरों की पौराणिक मान्यता एक जैसी ही है। विंध्यवासिनी की कहानी भगवान श्री कृष्ण के जन्म से जुड़ी है। विंध्यवासिनी ने यशोदा के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। देवकी के आठवें गर्भ में जन्मे पुत्र से कंस की मृत्यु की पहले ही आकाशवाणी हो चुकी थी। ऐसे में जब देवकी की आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण ने जन्म लिया तो बसुदेव ने श्रीकृष्ण को यमुना नदी के पार नन्द और यशोदा के घर पहुँचा दिया था। वहाँ से कन्या के रूप में जन्मी विंध्यवासिनी को बसुदेव मथुरा ले आए थे। कंस ने जब देवकी की आठवीं संतान के रूप में कन्या को देखा तो उसे मारने का प्रयास किया। उस कन्या ने कंस से कहा, ” तेरा वध करने वाला देवकी की आठवीं संतान के रूप में जन्म ले चुका है। ” ऐसा कहकर वह आकाश मार्ग की ओर जाने लगी। बाद में इसी कन्या ने विंध्य पर्वत में रहकर तपस्या की और वह विंध्यवासिनी कहलाई। कई स्थानों पर विंध्यवासिनी कंसमर्दनी नाम से भी जानी जाती है।ऋषिकेश स्थित यह मंदिर कितना पुराना है? इस बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। कहा जाता है कि ऋषिकेश स्थित विंध्यवासिनी किसी व्यक्ति के सपने में आई। सपने में देवी ने उस व्यक्ति को बताया कि एक पहाड़ के ऊपर देवी विराजमान है। वह व्यक्ति उस स्थान पर गया तो उसे देवी की मूर्ति दिखाई दी। तब वहाँ पर उस व्यक्ति ने मंदिर बनाया। ऐसा भी कहा जाता है कि गुलाम भारत में इस स्थान पर स्वतंत्रता सेनानी छिप कर आंदोलन की रणनीति बनाते थे क्योंकि यह स्थान ब्रिटिश सरकार के पहुँच के बाहर था। इस मंदिर से नीचे सूखी नदी के स्थान पर अष्टमी नवरात्रि के दिन मेला लगता है। उस दिन यहाँ भक्तों की बड़ी भीड़ देखी जा सकती है। यहाँ कुछ होटल और दुकाने भी हैं। यहाँ आकर हरे भरे पहाड़ी जंगल के सौंदर्य दर्शन का आनंद लिया जा सकता है।

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